स्कूल तो खुल गये। अब वही कहानी दोहरायी जायेगी तो सदियों से चली आ रही है। वो फिल्म का गाना है न -
‘‘कैसी ये कहानी,
कुछ अनकही।’’
मिंकी परेशान नहीं है अब। मिंकू हैरान नहीं है अब। आरजू को लगता है कि पढ़ाई नहीं है फालतू की चीज। नन्हीं शुभी के लिए क्रेजीनैस का टाइम फिर शुरु हो चुका। आकाश फिर से दौड़ भाग में जुट गया। जाने कितने बच्चे दौड़ रहे हैं इधर से उधर। फिर कुछ फिल्मी हो जाये -
‘‘दौड़ा-दौड़ा....भागा-भागा सा...।’’
जिंदगी कहीं यूं ही न निकल जाये दौड़ते-भागते। उफ्! कितनी टेंशन है भाई।
क्या करें पढ़ना पढ़ता है।
बिना बात के अड़ना पड़ता है।
किताबों से लड़ना पड़ता है।
फिर बड़ा आदमी बनने का सपना कौन पूरा करेगा?
तेरा.....डैश।
ऐ..बाजू हट...चल कुछ नया बजा।
बोरीयत और नींद को मारनी पड़ती है गोली...वरना पढ़ाई-लिखाई में बज जायेगा बैण्ड।
फिर कुछ याद आ गया-
‘‘आ कहीं दूर चले जायें हम,
न हो कोई गम....
तारा रम पम...तारा रम पम।’’
-Harminder Singh
‘‘कैसी ये कहानी,
कुछ अनकही।’’
मिंकी परेशान नहीं है अब। मिंकू हैरान नहीं है अब। आरजू को लगता है कि पढ़ाई नहीं है फालतू की चीज। नन्हीं शुभी के लिए क्रेजीनैस का टाइम फिर शुरु हो चुका। आकाश फिर से दौड़ भाग में जुट गया। जाने कितने बच्चे दौड़ रहे हैं इधर से उधर। फिर कुछ फिल्मी हो जाये -
‘‘दौड़ा-दौड़ा....भागा-भागा सा...।’’
जिंदगी कहीं यूं ही न निकल जाये दौड़ते-भागते। उफ्! कितनी टेंशन है भाई।
क्या करें पढ़ना पढ़ता है।
बिना बात के अड़ना पड़ता है।
किताबों से लड़ना पड़ता है।
फिर बड़ा आदमी बनने का सपना कौन पूरा करेगा?
तेरा.....डैश।
ऐ..बाजू हट...चल कुछ नया बजा।
बोरीयत और नींद को मारनी पड़ती है गोली...वरना पढ़ाई-लिखाई में बज जायेगा बैण्ड।
फिर कुछ याद आ गया-
‘‘आ कहीं दूर चले जायें हम,
न हो कोई गम....
तारा रम पम...तारा रम पम।’’
-Harminder Singh
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