Subscriber Box

रविवार, जून 16, 2013

छुट्टियों में क्या किया......झक मारी!!

सुनने में आ रहा है कुछ बच्चे आजकल पूरी तरह छुट्टियों में इन्वाल्व हैं। घुलने-मिलने का शानदार टाइम। मतलब टेंशन-फ्री। वाओ क्या बात है? काश मेरी भी छुट्टियां होतीं।

  नन्हीं शुभी अब नन्हीं नहीं रही। उसका धमाल जारी है। यह कैरेक्टर ऐसा है जो रियल लाइफ में ही मेरे पास हमेशा रहने वाला है। क्या करें वह है ही ऐसी।

  बाई दा वे, भैया रास्ता छोड़ो। वक्त तेजी से भाग रहा है। चंद दिन और ......फिर...। ....फिर क्या???...

  इतने सारे प्रश्न-चिन्ह!!

  हद हो गयी, तुसी बिल्कुल क्रेजी कर दित्ता।

  बच्चे अभी चिंता से मुक्त हैं। लेकिन काउंटडाउन बिगेंस अंकल!

  और ये छु्ट्टी का आखिरी दिन....और खिलाड़ी क्लीन बोल्ड!!

  लेकिन ये कहानी उनकी जिनसे पूछा जायेगा-‘छुट्टियों में क्या किया?’

  वे बुरे मन से बोलेंगे-‘कुछ नहीं यार........झक मारी!!’

  जस्ट चिल यार!
  टेंशन को गोली मार!
  बिना तेल के डब्बा है कार!

  कोई नहीं, अभी टाइम है जनाब। तो होली-भजन बहुत हो चुका होगा। और हां, झक जितनी मारनी थी, मार ली होगी।

  चलो चलें कुछ काम करें,
  ईश्वर को प्रणाम करें,
  होली-भजन हुआ बहुत,
  अब किताबों को प्रणाम करें।

  कूल मंत्रा फोर कूल बच्चास।

yours

harminder

0 comments