
जिस लड़के ने उस लड़की के साथ झड़प की थी उसकी सगी नानी घर के सामने पानी भरे गड्ढे में गिर गयी थी। वह सुबह से ही काफी खफा था क्योंकि इस चक्कर में उसके खुद की यनीफार्म भी खराब हो गयी थी। उसने जो शर्ट पहनी थी वह उसके छोटे भाई की थी जिसका एक बटन टूटा था। कमीज पैंट में ठीक से दब नहीं पा रही थी। जूतों में पानी भरने के कारण वह पड़ोसी के लड़के के मांग कर पहन आया था जिनका नंबर छोटा था। वह चल भी डेढ़ामेढ़ा ही रहा था इसी कारण। कुल मिलाकर कहें उसका वह दिन ही खराब था।
कुछ घंटों में जगवीर सिंह से उसका आमना सामना भी होना था जिसको बदलना नामुमकिन था। लड़की से सामना भी होना नियती थी। बिना सोचे समझे कहा जा सकता है कि दिन की बैण्ड बजनी थी और वह भी सरे बाजार थू-थू के साथ।
कई लड़कियों को मैंने यह कहते सुना था -‘भगवान ऐसा किसी के साथ न हो।’ अब इससे ज्यादा मेरे लिए क्या सुनना बाकी रह गया था।
उस लड़के की एक बात बतानी भूल ही गया कि उसकी पेंट की सिलाई भी उधड़ी हुई थी। अंदाजा लगाया जा सकता है कहां से हो रहा होगा विभाजन। खैर, उतना तो नहीं था लेकिन पैंट चूंकि उसकी नहीं थी इसलिए वह उसके फिट नहीं थी, खूब कसी हुई थी। अब हिलने डुलने के कारण सिलाई में भी थोड़ा बहुत खिचाव होना सामान्य सी बात थी। तो हरी पैंट पर सफेद धागे उसके चलने पर पीछे से लहराते हुए साफ देखे जा सकते थे। उसे इस बात का पता भी स्कूल जाते ही लग चुका था, लेकिन क्रिकेट चल नहीं रहा था जो पीछे लंबा सा सफेद टावल या रुमाल टांग लेता। उसे पता था यदि वह ऐसा करता तो जगवीर सिंह का हाथ उसपर सुबह ही साफ हो जाता।
बेचारा लड़का खुद से ही लड़ाई लड़ रहा था। ऊपर से एक्जाम टाइम, तो टेंशन ने उसकी जान ही ले लेनी थी। सोने पर सुहागा ये कि पास भी चीटिंग के सहारे होने की कसम उसने खा रखी थी। कहने का मतलब यह कि हर तरफ से समस्यायें उसे चपेट में ले चुकी थीं।
अब वह उस लड़की को न पीटता तो गुस्सा क्या मास्साब पर निकालता?
-harminder singh
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