Subscriber Box

रविवार, मई 19, 2013

शुभी की मजेदार कहानी


बहुत दिन हो गये। यों कह लीजिए एक लंबा अरसा, नन्हीं शुभी से कोई मुलाकात नहीं हुई। उसकी शरारतें भला कैसे भूली जा सकती हैं। उस दिन मिली तो छोटी सी मुस्कान बिखेर कर बोली कि कहां से आ रहे हैं? मैंने भी मजाक में कह दिया,‘पता नहीं, पर अब तुम्हें मैथ्स की छोटी-मोटी प्रोब्लम्स बताने का टाइम नहीं।’

  मैंने पड़ोस के सभी बच्चों के लिए छोटी-छोटी, मुश्किल से 30 पन्नों की किताबें प्रिंट की थीं जिनका वितरण उन्हें एक ही साथ किया। बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसमें हर किसी के लिए कुछ न कुछ था। हर बच्चे का फोटो उसके कवर पेज पर सजा था। फोटो मेरे द्वारा ही खींचे गये थे। सभी बहुत खुश थे। शुभी तो चहके बिना रह न सकी। उसकी खुशी इतनी थी कि वह दौड़ी-दौड़ी अपना फोटो सबको दिखा रही थी।

  मजेदार बात यह थी कि हर किताब में शुभी के बारे में सबसे अधिक पन्ने सजे थे। उसके बारे में एक मजेदार लेख लिखा था मैंने।

शुभी मुझे मारना चाहती है?

वह गिरकर खुद हंसती है

सवाल पीछे डंडा लेकर

  आज शुभी बड़ी हो रही है। वह अपनी पढ़ाई के प्रति संजीदा है। जानता हूं मैं और वह भी कि उसकी शरारतें छूटने वाली नहीं जिनका जिक्र मैंने पहले कई बार किया है, इस बार नहीं। अगली बार स्कूल लाइव पर सोच रहा हूं कि उसकी शरारतों की एक लिस्ट छापी जाये जिसमें कुछ ऐसी बातें भी हों जो शुभी को पता नहीं और जाने अनजाने में वह कर गयी।

  वैसे एक बात यह है कि शुभी की कहानी में ड्रामा भरपूर है। एक्शन होगा ही क्योंकि उसने टाइक्वांडो भी महज दो-तीन ही सीखी है। इमोशनल रुप में भी वह मुस्कराती रहती है। कुल मिलाकर उसकी स्टोरी एक परफेक्ट गर्ल की है जो मजाकिया है, लेकिन पढ़ाई के मामले में काफी सीरीयस है। इस बार उसने अपनी क्लास में टाप तीन में जगह बनाई।

  मिलते हैं अगली बार शुभी के एक रोचक किस्से के साथ।

-Harminder Singh

Read All About Shubhi CLICK HERE>>>>

Previous Posts :

2 टिप्‍पणियां: