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| मैं जानता हूं कि वह शुभी नहीं जो मुस्कराती हुई आपको बुरा-भला कह जाये. in the pic : shivani. |
शिवानी आम बच्चों की तरह है। पढ़ाई-लिखाई का उसे भी ढेर सारा काम है। आजकल स्कूल में प्रोजेक्ट-फाइल्स के कारण सभी बच्चों की नींद हराम है। अब क्या बताया जाये, ऊपर से इतनी गरमी और इसपर इतना बोझ।
स्कूल का होमवर्क फिनिश करते-करते बच्चों का सब्र भी लगता है फिनिश हो रहा है। वे झुंझलाये हुए भी रहने लगे हैं। उनके चेहरे इतना कुछ तो बता पाते नहीं, और अंदर कोई किसी के झांक नहीं सकता।
हम शिवानी की बात करते हैं। कुछ दिन पहले की ही बात है कि कुछ मैथ्स के सवालों में वह बुरी तरह उलझ गयी। जायज था, वह परेशान हो गयी। उसका चेहरा साफ बता रहा था कि वह टेंशन में है। वैसे भी आमतौर पर वह इस तरह से रहती है जैसे किसी बड़ी मिस्ट्री में उलझी हो। लेकिन उसका छोटा भाई खुद एक मिस्ट्री की तरह है।
खैर, सवाल उसे बाद में समझ आया। तब भी वह गुस्से में थी। वैसे कई बार मुझे उसके चेहरे को देखकर डर भी लगने लगता है। मैं जानता हूं कि वह शुभी नहीं जो मुस्कराती हुई आपको बुरा-भला कह जाये।
शिवानी की समस्या आज से नहीं, काफी समय से है। वह गुस्सा बहुत जल्दी कर जाती है। वह उन बच्चों की कैटिगरी में आसानी से रखी जा सकती है जो थोड़ी निराशा को अपने गुस्से का आधार बना लेते हैं। वे खुद भी नहीं जानते कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? बस कर देते हैं।
गुस्सैल मैं भी खूब था
एक बात मैं बताना चाहूंगा कि बचपन में गुस्सा मेरी नाक पर रहता था। मोहल्ले में अक्सर धनी-मनी की चर्चा होती रहती है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वे ब्रदर्स तो कुछ भी नहीं जो अपने जमाने में मैं था। मुझे लोग काफी गुस्से वाला बच्चा मानते थे। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि यदि मेरी ओर किसी ने मुस्कराकर यह कह दिया-‘बेटा तुम्हारी कमीज कितनी अच्छी है।’ या ‘बेटा तुम्हारे जूते सुन्दर हैं’, बगैरह-बगैरह। यह सुनकर भी मेरा पारा चढ़ जाता। उस समय जो मेरे हाथ में आता सामने वाले पर फेंक देता। कमाल था न कि कोई आपकी तारीफ करे तो आपको बुरा लगे। कई बार तो मैंने अपनी कमीज तक बिना बटन खोले ही खींच कर उतार फेंकी।
वट आइ एम नोट ए फैन आफ सलमान, पर फिर भी....। पता नहीं क्यों?
लगता है खुद की गुस्से वाली कहानी लिखने के लिए कई बेव पेज चाहिएं।
yours
Harminder.
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