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मंगलवार, मार्च 20, 2012

गणित की टेंशन : नो वे

mathematics tension, maths, easy wayगणित, गणित और गणित। अधिकतर बच्चे गणित का नाम लेते हैं तो उनके चेहरे पर अल्फा, बीटा, गामा तैर रहे होते हैं। सिर पर रुटों(roots) का हमला और कंधे पर ट्रिग्नोमैट्री(trignometry) के थीटा टंगे होते हैं। बेचारे डर-डर के जी रहे होते हैं। कभी-कभी मैं सोचता हूं -‘‘ऐसा जीना भी कोई जीना है।’’

दरअसल मैथमैटिक्स को एक डरावने रुप में पैदा करने वाले खुद हम ही तो हैं। इसे आप ‘भय का भूत’ भी कह सकते हैं। न भय होगा, न भूत दिखेगा। इसलिए बनो बहादुर, भय को करो बाहर। फिर देखो गणित तुम्हें डरा भी दे। डरना तो दूर गणित करने में तुम्हें आनंद आयेगा। फिर तुम्हीं बाद में कहोगे -‘अरे! यह सबसे मजेदार विषय निकला।’

हमारी समस्या यह रही है कि हमने अपने मस्तिष्क को जोर देने की ओर ध्यान नहीं दिया। हमने यही सोचा कि अधिक माथापच्ची से फायदा कैसा? शायद हम यह भूल गये कि जितना मस्तिष्क हम इस्तेमाल करेंगे उतना ही यह शार्प या तेज होगा।

एक बात सबसे अहम यह है कि जो विद्यार्थी गणित में तेज होंगे उनकी पकड़ दूसरे विषयों पर भी बेहतर होगी। अब यदि वे केवल गणित ही करने में जुटे रहें तो दूसरे विषय में वे इंटरेस्ट न दिखायें तो बात जमती नहीं। उत्साह हर विषय में विद्यार्थी को चाहिए। पढ़ाई को शांत मन से किया जाये, परिणाम सुखद ही रहेंगे।

मेरा अपना मानना है कि गणित से घबराने की जरुरत नहीं है। गणित की टेंशन को जाने दो माउंट एवरेस्ट पर। अब सवाल टेड़े-मेढ़े हैं, पर हमारा कुछ नुक्सान कर देंगे क्या? ध्यान से सोचने पर उत्तर मिलेगा -‘कुछ भी तो नहीं, महज सवाल ही तो हैं।’

ठंडे दिमाग से, भरोसे के साथ बिना घबराये हम हल भी कर देंगे, इसमें टेंशन की क्या बात है।

हमने कभी सोचा है कि यदि हम घबराते रहेंगे और गणित से बचते रहेंगे तो हम उस विषय को कभी समझ नहीं पायेंगे। सबसे पहले आसान सवालों से शुरुआत कर कर देखें। नतीजे आपको चौंका सकते हैं। आप स्वयं पर भरोसा करना सीख जायेंगे कि आप गणित में और बेहतर कर सकते हैं। धीरे-धीरे आपका आत्मवि”वास बढ़ता जायेगा। हम यह जानते हैं कि शुरुआत हमेशा छोटे से करनी चाहिए और धीरे-धीरे तरक्की होती रहेगी। यह काफी मजेदार भी होता जायेगा क्योंकि हम सवालों को उनकी नर्सरी से समझते जायेंगे। परिणाम हमारे सामने होगा और हमारा उत्साह बढ़ता जायेगा। यह तरीका सबसे बेहतर तरीका है।

फिर खुद पर हमें यकीन अधिक होता जायेगा कि हम गणित को आसानी से कर सकते हैं। उसके बाद कठिन सवालों को करने की कोशिश कीजिए। उनमें प्रारंभ में कुछ परेशानी आये, आने दीजिए। हम यह भी जानते हैं कि शुरुआत में अक्सर परेशानियां आती हैं, लेकिन हम अगर स्वयं पर भरोसा करें कि हम किसी भी परेशानी को पार करने में सक्षम हैं तो नतीजे हमारे पक्ष में होंगे। जटिल सवालों को हम कई बार करेंगे और तब तक करेंगे जबतक हमें यह न लगने लगे कि आखिर इनमें इतनी जटिलता कहां से आयी। हमें स्वयं ही उत्तर मिलेगा-‘अरे, हम ही इन्हें कठिन समझ रहे थे, ये तो बेहद आसान हैं।’ फिर क्या, हम जटिल सवालों को भी चुटकियों में हल कर लेंगे।

सवाल तो हमने कर लिए। उनका अभ्यास भी उतना ही जरुरी है। इसके लिए हम गणित के सवालों का नियमित अभ्यास भी करेंगे ताकि वे हमसे दूर न रहें।

एक बात और अहम है कि गणित के लिए अनुशासन की भी आवश्यकता है। हमें चाहिए कि हम स्वयं को अनुशासित रखें जिससे हम सवालों को नियमित रुप से हल करें।

-Harminder Singh



2 टिप्‍पणियां:

  1. अब हमें कोई इस तरह से आलेख लिखकर समझाने वाला नही था की गणित की टेंशन को कैसे भगाए इसलिए हमेशा गणित से डर ही लगता रहा :-) ..अच्छी पोस्ट और खुबसूरत लेखन

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  2. badhiya post! agar is blog ka background color change kar diya jaye to ye rochak ke sath manmohak bhi lagega .

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