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सोमवार, अक्टूबर 17, 2011

सवाल पीछे डंडा लेकर

shubhi love to tease mathematical problems while priya don't....
प्रिया फिर वैसी हो गयी। अब उसने पढ़ाई से पूरी तरह हाथ खींच लिए। शुभी ने बताया कि प्रिया गुनगुन को खिलाती रहेगी, तब उसे चेहरे के भाव वैसे ही रहेंगे। उसकी किताब खुली रहेगी, तब भी वह उसी तरह किसी ओर दुनिया में खोई रहेगी। जबकि दीपक का कहना है,‘इसने घर में पढ़ना बिल्कुल छोड़ दिया।’

मैंने प्रिया से कहा,‘तुम सवालों से डरना छोड़ दो। पढ़ाई जमकर करो। ये सवाल मामूली हैं, चुटकी के हैं। भला इनसे हमारा क्या बिगड़ा। वैसे भी पढ़ाई लिखाई हम इंसानों ने ही बनाई है। फिर क्यों हम डरें?’

‘ऐसा करो कि सवाल तुमसे डरें। अब तुम डर रही हो और सवाल डंडा लेकर तुम्हारा पीछा कर रहे हैं। जरा ध्यान से सोचो, कुछ भी तो नहीं हैं। अब शुभी को ही देख लो, सवालों के पीछे डंडा लेकर पड़ी रहती है। इसलिए वह खुश रहती है, और बेचारे सवाल ‘भीगी बिल्ली।’

मेरे इस ‘उपदेश’ का पता नहीं कितना असर होगा प्रिया पर, लेकिन सवालों से डरना बड़ी बेवकूफी लगती है।

yours

harminder


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