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| Prabhat the pujari of cartoons... |
हाल ही में प्रभात के यहां डिश टीवी लग गया। अब प्रभात घर से बाहर पैर रखने को टाइम-वेस्ट करना कहता है। घर में कार्टून देखो, यही है टाइम का सदुपयोग।
भई वाह! तुम इतने समझदार हो गए प्रभात, हमें मालूम न था।
प्रश्न फिर सीरीयस हो गया :
‘क्या प्रभात पढ़ाई कर पायेगा?’
उत्तर : शायद नहीं।
यह प्रभात का नारा होगा :
‘टीवी से हमको प्यार है,
बिना इसके जीना बेकार है,
पढ़ाई से इंकार है।’
यकायक दूसरे प्रश्न से सिर उठाया :
‘क्या होगा यदि प्रभात लगातार कार्टून देखेगा?’
उत्तर : बच्चे उसे शक्मिान काफी समय से पुकारते आये हैं, जबकि मैं गंगाधर। शेष उत्तर हर किसी का अंदाजा...।
मुझे लगता है प्रभात को एक मंदिर खोल लेना चाहिए। डोरेमोन की मूर्ति सामने लगी होगी। उसपर फूलों का हार। ढेर सारे कार्टून पात्र भी टिके होंगे मंदिर में।
हमारे प्रभात भाई आरती करने में व्यस्त होंगे :
‘बोलो डोरेमोन भैया की जय!!’
yours
harminder

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