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| shubhi harshana from gajraula, st. mary's convent school, gajraula... |
वह जब देखो तब कुरसी से गिर जाती है। ऐसा एक बार नहीं पिछले तीन साल में कई बार हो चुका। मजे की बात यह कि उसे चोट एक बार भी नहीं लगी। जिस तरह वह कुरसी से गिरती है उससे उसका माथा क्षतिग्रस्त हो सकता है, लेकिन वह शायद ‘स्लो-मोशन’ में गिरती है इसलिए बच जाती है। लोग कुरसी से अक्सर पीछे की ओर पलटने से गिरते हैं, वह आगे की ओर गिरती है। लोग प्राय: गिरने के बाद डर जाते हैं, रो भी सकते हैं, लेकिन वह उल्टा हंसती है, वह भी जी खोल कर। उसका हंसते-हंसते मुंह तक लाल हो जाता है।
ऐसा काम मेरे मुताबिक दुनिया में एक शख्स कर सकता है और वह है हमारी शुभी।
मुश्किल से कुछ हुए वह कुरसी से फिर आगे की ओर गिरी। खुद की हंसी छूट गयी। बाकी भी अपनी हंसी न रोक पाये। शिवानी ने पूछा,‘हम उसपर हंसे, वह रोई क्यों नहीं?’
मेरा उत्तर था,‘अगर उसके हंसने से पहले हम हंस देते तो शुभी यहीं आंसुओं की खारी नदियां बहा देती।’
yours
harminder

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