स्कूल जाना, वह भी रोज-रोज हर किसी को अच्छा नहीं लगता। इसी वजह से बच्चों ने मजबूरी में बहाने बनाने शुरु किये। समय बदला, बहाने भी। वैसे जब थर्मामीटर नहीं होता होगा तो क्या बहाना होता? लेकिन मुझे कुछ बच्चों ने उनके द्वारा बनाये गये बहाने बताए। आप भी जरा गौर कीजिए :
1. पेट दर्द : ‘मम्मी पेट में दर्द है। देखो मैं उठ भी नहीं पा रहा।’
2. पढ़ाई नहीं होगी आज : ‘फंक्शन की तैयारी चल रही है। ज्यादातर टाइम बाहर ही रहते हैं।’
3. सिर में दर्द : ‘मेरा सिर बहुत दुख रहा है। क्लास में ढंग से ध्यान नहीं दे पाउंगा। दस बजे डाक्टर अंकल के पास जाकर दवाई ले लूंगा।’
4. # $ # $ @ # # $ :
ये सारे बकवास बहाने हैं। दर्द, बुखार, जुकाम जैसे बहानों को मम्मी-पापा समझ जाते हैं। अगर असलियत में ये सब हो तो भी उन्हें मालूम पड़ जाता है।
Afterall Kids are Kids and parents are Parents !
वैसे बच्चे होते पक्के बहानेबाज हैं। सब नहीं पर जो होते हैं उनकी संख्या भी हर स्कूल में काफी होगी।
एक राज की बात जो अब राज नहीं रही कि स्कूल न जाने के कई बार मैंने भी बहाने बनाये हैं। सक्सेस रेट : करीब 70 परसेंट।
शुरु में बात थर्मामीटर की हुई थी, उसमें चाय भी शामिल थी। जानता हूं कन्फ्यूजन है। इस बहाने को जल्द ही पढ़ियेगा।
आखिर में एक बात : शुभी की एक बुआ डाक्टरनी हैं, सो शुभी के पास थर्मामीटर उस दिन था। किस दिन?
बाकी बाद में .......
क्योंकि कल भी यहां आना है....
yours
harminder
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