रोहित दिल्ली में पढ़ रहा है। शुभांगी भी उसी स्कूल में है। उसकी दोस्त शिवानी भी वहीं है। कुल मिलाकर दो बच्चे हमारे पड़ोस के बाहर जाकर ग्यारहवीं की पढ़ाई में व्यस्त हैं।
अगर में रोहित की बातों पर यकीन करुं तो मुझे उनके स्कूल या कालेज में टीचर होना चाहिए था। वह शायद समझ जायेगा जब इसे पढ़ेगा कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं। अब लोगों को भूला भी तो नहीं जाता, खासकर मि. रोहित भड़ाना साहब को। ठीक कहा न मैंने रोहित। लेकिन मुझे लगता है कि वह भी कई लेागों की तरह कन्फ्यूजन में है। मुझे पता है शुभांगी कभी कन्फ्यूज नहीं होगी।
खैर रोहित जनाब से मैं यह कहना चाहूंगा कि बेचारी मिंकी तुम्हारे जाने के बाद काफी परेशान हो गयी थी। ऐसा नहीं है कि वह ‘रोहित भैया’, ‘रोहित भैया’ चिल्लाती रहती है, लेकिन वह दुखी इसलिए है कि उसे झगड़ने के लिए अब कोई नहीं मिल रहा। अब ऐसा भी नहीं है कि मिंकी झगड़ालू है, मगर मटरगश्ती करने में बच्चे भला बाज कहां आते हैं।
रोहित के बारे में एक बात कहनी होगी कि यह लड़का बड़ा नेक है, शांत है, मृदुभाषी है, बगैरह, बगैरह। यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मेरा उसे कभी झगड़ा नहीं हुआ। वैसे अगर झगड़ा हो जाता तो दोगुनी तारीफ करता, थोड़ा तड़का लगाके।
अब सोचने वाली बात यह है कि झगड़ती तो शुभी भी मुझसे है, रोती भी है कभी-कभी, फिर भी मैं उसका कितना गुणगान करता हूं।
रोहित मेरी ओर से कई बच्चों को तुम चाहो तो ‘प्रणाम’ कह देना। वैसे ये सब छोटे ही हैं, मेरे नाना या दादा की उम्र के नहीं। लेकिन तुम बस कह देना। आखिर तुम सब लोग देश की राजधानी में जो रहते हो!
yours
harminder
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