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सोमवार, जुलाई 04, 2011

फर्स्ट डे, फर्स्ट शो

















स्कूल का पहला दिन थोड़ा अजीब किस्मा का होता है। स्टूडेंट काफी समय बाद फिर से उस माहौल की ओर रुख करते हैं जिसमें वे फिर से एडजस्ट करने की कोशिश करेंगे। इसमें ‘एडजस्ट’ वाली बात मायने रखती है।

लंबे होलीडे बीत तो गये, मगर बहुत सों को थोड़ा लेज़ी भी बना गया। अब समय का पाबंद होना पड़ेगा। सुबह जल्दी उठना पड़ेगा। पहले क्या था कि सूरज हमसे पहले जाग जाता था।

भारी बस्ता, कंधों पर किताबों का बोझ। स्कूल में टीचरों से सामना, वही बोरिंग क्लसेज। पर हर किसी की सोच ऐसी नहीं है।

कुछ तो जाने कब से बेचैन थे अपने दोस्तों से मिलने को डाइंग टू मीट फ़्रेंड्स। चलिए उनकी मुराद पूरी हो गयी। फर्स्ट डे, फर्स्ट शो की तरह शानदार रहा स्कूल का पहला दिन। बस फर्क इतना है कि यहां हिट और फ्लाप खुद पर डिपेंड करता है।

आपका

Harminder Singh

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