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शुक्रवार, जुलाई 15, 2011

दोस्तो ये दोबारा कब होगा

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राह देखी थी जाने कब से,
सपने सजा के रखे थे जाने कब से,
बड़े उतावले थे यहां से जाने को,
जिंदगी का अगला पड़ाव पाने को,

पर न जाने क्यों दिल में कुछ ओर आता है,
वक्त को रोकना कौन चाहता है,
जिन बातों पर लड़ते थे कभी,
आज उनपर हंसी आती है,
जाने क्यों उन पलों की याद आती है,
कहा करता था -ये साल सह गया,
क्या लगता है आज कि कुछ पीछे रह गया।

न भूलने वाली कुछ यादें रह गयीं,
जो अब जीने का सहारा बन गयीं,
मेरी टांग अब कौन खींचा करेगा,
मेरा सिर खाने, कौन मेरा पीछा करेगा,
रोज स्कूल से छुट्टी के बहाने कौन बनायेगा,
स्कूल लेट होने पर लेक्चर कौन सुनायेगा,
कौन फेल होने पर दिलासा दिलायेगा,
कौन अच्छे नंबर आने पर गलतियां सुनायेगा,
कौन मेरे साथ दूसरों का टिफिन चुरा खायेगा,
और, पकड़ा जाने पर पेट दर्द का बहाना बनायेगा,
बोतल में चाय किसके साथ पिऊंगा,
वो हसीन पल किसके साथ जिऊंगा।

ऐसे दोस्त कहां मिलेंगे,
जो खाई में भी धक्का दे आयें,
फिर तुम्हें बचाने खुद भी कूद जायें,
तेरे मस्त-मस्त दो नैन, गाने से परेशान कौन होगा,
किसी लड़की से बात करते देख बेचैन कौन होगा,
कौन कहेगा तेरे जोक पर हंसी नहीं आती,
कौन कहेगा ये पढ़ाई दिल को नहीं भाती।

दोस्तों के लिए टीचर से अब कब लड़ पायेंगे,
उनकी खातिर सस्पेंड कब हो पायेंगे,
कह दो यारो क्या हम ये फिर कर पायेंगे?

ट्यूशन के बहाने सिआना कौन जायेगा,
हर लड़की देख खुद को टाम क्रूज़ कौन बतायेगा,
कौन मुझे काबिलियत का भरोसा दिलायेगा,
और, ज्यादा हवा में उड़ने पर जमीन पे लायेगा।

मेरी खुशी में सच में खुश कौन होगा,
मेरे गम में मुझसे ज्यादा दुखी कौन होगा,
कह दो दोस्तो ये दोबारा कब होगा.....।

-Shivender kumar yadav


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