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शुक्रवार, जुलाई 15, 2011

कल्लो हर जगह होती है

पड़ोस में हुई रामायण में हमारी बूढ़ी ताई की पोती कल्लो मौजूद थी। बड़ी ही श्रद्धा से वह रामायण का पाठ कर रही थी। उसे आप देखकर यही कहेंगे कि यह लड़की पंडित जी के साथ है। कल्लो को धार्मिक आयोजनों में भाग लेना अच्छा लगता है। इसके लिए वह अपनी पढ़ाई भी दांव पर लगा सकती है। लेकिन स्कूल जाना नहीं छोड़ती।

इस बार भी वह सुबह तीन बजे के आसपास रामायण स्थल पर पहुंच गयी। मुझे स्पष्ट उसकी आवाज सुनाई दे रही थी। वैसे वह पाठ अच्छा कर लेती है। उसकी तारीफ हर कोई करता है।

दीपी और शिवानी कह रहे थे कि कल्लो की आवाज और पढ़ने का तरीका बुरा नहीं, बल्कि सुनने में अच्छा लगता है।

उधर शुभी कह रही थी,‘यह कल्लो भी न, सब जगह पहुंच जाती है।’ यह कहते हुए वह हमेशा ही तरह मंद-मंद मुस्करा रही थी।

कल्लो रामायण में भी शरीक हुई और सुबह तसल्ली से पढ़ने भी गयी। स्कूल से लौटकर फिर रामायण का पाठ करने में तल्लीन हो गयी।

कल्लो का असली नाम मुश्किल से ही लोग जानते हैं। वह काली बिल्कुल नहीं। (in the pic : kallo)

yours

harminder


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