रामायण के पाठ की समाप्ति हो गयी। ‘राम-राम’, ‘सीता राम’ की ध्वनि हर जगह गूंज रही थी। पाठ करने वाले पंडित जी तन्मय होकर गा-बजा रहे थे। जिनके यहां यह धार्मिक आयोजन था, वे पूरे भक्तिमय हो चुके थे। उनके लड़के नितिन का जन्मदिन जो था।लाउडस्पीकर दो लगे थे, लेकिन वाल्यूम काफी तेज इसी आशय से की गयी थी कि पाठ दूर तक माहौल को भक्ति से पूर्ण कर दे। चूंकि हमारा घर सटा हुआ है, इसलिए हमें आपस में चिल्लाकर बात करनी पड़ रही थी। या फिर कमरे में जाकर बातचीत करनी पड़ती, और वह भी उसे बंद कर।
ऐसा बिल्कुल नहीं था कि रात में कान में रुई डालकर सोना पड़ा, लेकिन बेचारी दीपी ने ऐसा जरुर किया होगा। उसे सुबह टैस्ट की तैयारी करनी थी। वह कमरे को कसकर बंद कर पढ़ी। हां, लाउडस्पीकर की ध्वनि वहां पहुंच रही थी लेकिन काफी कम।
दीपी थोड़ी टेंशन में दिखी, लेकिन दो साल पहले धनी-मनी के जन्मदिन के मौके पर रामायण का पाठ हुआ था। उनके एक्साम थे। पर वे बिना पढ़े ही एक्साम देते रहे और पास भी हो गये। पंडित जी को भी काफी परेशान किया। शायद भगवान की कृपा ने उन्हें एक्साम की वैतरणी से पार किया।
लेकिन याद रखिये, हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता।
yours,
Harminder
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