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बुधवार, जुलाई 20, 2011

रोने-धोने का कार्यक्रम

crying session at schoolगलती से उस दिन मेरा रिपोर्ट-कार्ड मेरे छोटे भाई के स्कूल बैग में चला गया और उसका मेरे बैग में आ गया। जिस समय रिपोर्ट-कार्ड जमा हो रहे थे, मुझे मालूम चला कि हमारे कार्ड बदल गये। पहले मैंने चंद मिनट सोचा कि भाई की क्लास में जाऊं या न जाऊं और कैसे जाऊं? इतनी हिम्मत नहीं थी कि टीचर से परमीशन ले सकूं।

खैर, ढेर सारी हिम्मत जुटाकर मैंने परमीशन ली और चला गया छोटे भाई की क्लास में। क्लास में एंटरी के साथ ही मेरी आंखों से आंसू टपक पड़े। सोचिए क्या इमोशनल एंटरी होगी? मैं रिपोर्ट-कार्ड सीने से लगाए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हूं। मुझे देखकर मेरा भाई भी मेरी और कुछ कदम चला। मेरी आवाज पूरी तरह भर्रा गयी।

टीचर से रोते हुए कहा,‘.....ये कार्ड...।’ उन्हें कुछ समझ नहीं आया, पर समझ गयीं।

भाई भी रो रहा था। दोनों ने रोते हुए कार्ड़ों का आदान-प्रदान किया। यदि उस समय बैकग्राउंड में इमोशनल फिल्म का स्लो म्यूजिक बज रहा होता तो सीन हिट था बोस।

आज वह दृश्य याद कर हंसी आती है। वैसे रोने-धोने की ऐसी बाल-लीलाएं होती कमाल की हैं।

-Harminder Singh



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