आरजू खुश है। वंशिका फूली नहीं समा रही। घर में नया मेहमान आया है। ढोलक की थाप और महिलाओं के गीत, माहौल हर्षपूर्ण हो गया। आरजू और वंशू अब अपने नन्हें भाई के इस रक्षाबंधन राखी बांधेंगी।प्यारा-प्यारा, मुन्ना-चुन्ना सा भैया!
सोच रहा हूं मैं भी उनके घर जाकर नये मेहमान को ढेर सारी बधाई दे आऊं। मुश्किल है क्योंकि मेरी साइकिल जो मैंने कल-परसों (मेरी याददाश्त भी न गायब हो जाती है) कबाड़ी से उधार ली थी। उसकी मरम्मत खुद करने की ठानी। अब साइकिल खुल तो गयी, पुर्जे कहां-कहां लगते हैं भूल गया।
अब आरजू कहेगी, पैदल चलने को किसी ने रोका था क्या। मेरे पास कोई उत्तर नहीं होगा। बस इतना कहूंगा,‘यह तो मैंने सोचा ही नहीं।’
खैर, आरजू जानती है कि मैंने घूमने-घामने का व्रत वर्षों पूर्व लिया था। उसी का पालन अभी तक कर रहा हूं।
yours
Harminder
MY diary previous read :
Badhai Ho
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