
किसी बात को लेकर नन्हीं शुभी एक्साइटेड थी। फिर उसने किताब के पन्ने उलटने शुरु किये। एक जगह जाकर वह रुक गयी। वहां उसकी टीचर का रिमार्क था। फिर क्या था शुरु हो गया शुभी का बोलने का कार्यक्रम।
‘मेरी क्लास टीचर है न, उनका नाम पता है क्या है?’
हम उसके चेहरे की ओर देख रहे थे। हम कुछ कह पाते वह बोल उठी,‘उनका नाम भी शुभी है -समथिंग शुभी अग्रवाल या फिर शुभी गोयल। पर वो आपसे छोटी हैं।’ उसने मेरी ओर देखकर कहा।
शुभी का मतलब है कि मैं उसके टीचरों से बड़ा हूं। कोई बात नहीं, स्टे कूल शुभी।
मैंने कहा कि मैं तो हर किसी को अंकल-आंटी कहता हूं। फिर मैंने शुभी के आगे दोनों हाथों को जोड़कर कहा,‘तुम्हें दादी जी, नानी जी, पता नहीं क्या-क्या कहता हूं।’ यह सुनकर अनमोल की हंसी छूट गयी।
हल्की सांस लेकर मैंने अनमोल से कहा,‘अब क्लास में दो-दो शुभी हो गयीं। एक स्टूड़ेंट, दूसरी टीचर। क्लास का क्या होगा?’
वैसे खूब जमेगा रंग जब मिल बैठेंगी शुभी दो।
वाओ क्या बात है?
yours
Harminder
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