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शुक्रवार, जुलाई 01, 2011

मेरे आंगन नीम खड़ा है


















मेरे आंगन नीम खड़ा है,
बीमारी से सदा लड़ा है।

देता है वह शीतल छाया,
चिड़ियों ने घोंसला बनाया,
हर मौसम में इसके नीचे,
हरदम ही मधुमास सुहाया।

कभी न आंधी में उखड़ता है,
मेरे आंगन नीम खड़ा है।

शाखों की दातून बनाते,
कुछ कोमल पत्तियां चबाते,
कुछ पीते फूलों का शरबत,
तरह-तरह के रोग भगाते।

कहते यह हकीम तगड़ा है,
मेरे आंगन नीम खड़ा है।

बाबा जी ने इसे लगाया,
हम सबको यह कितना भाया,
दूर प्रदूषण यह करता है,
जिसने रोपा, वह फल पाया।

इसने नव इतिहास गढ़ा है,
मेरे आंगन नीम खड़ा है।

-Suman Bisht

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