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इस क्रिकेट के सीजन में हर कोई क्रिकेट के रंग में नहाया है। शिवानी, शिवी, दीपी और मिंकी जैसी लड़कियां जमकर खेल रही हैं। इस कारण मोहल्ले में थोड़ा शोर बढ़ा है, पर बच्चों की खुशी उनके धमाल मचाने में ही है।
हमने जिस मेहनत से बैडमिंटन कोर्ट बनाया था, उसे मैं अपनी आंखों के सामने उजड़ता देख रहा हूं। अब मेरी मां को लगता है कि लड़कियों को खेलते देना चाहिए।
मुझसे कहा कि अभी मेरे पास खेलने का समय नहीं है, इसलिए कोर्ट को पिच बनाने में कैसी बुराई?
पहले दिन जब शिवानी मुट्ठी भर दोस्तों के साथ मैदान में आयी तो शुभी भी आ गयी। लड़कियां थीं, क्रिकेट के रुल उन्हें मालूम नहीं थे, थोड़ी नोकझोंक भी हुई। मगर शांत हो गयी।
मिंकी का भाई मिंकू एक्साम टाइम में भी खूब खेलना चाहता है। वह कभी स्टंप गिरा देता, कभी बल्ला झाड़ियों में छिपा देता। फिर निशांत की एंटरी के कारण दो-तीन जने और आ धमके।
शिवानी को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कि कोई उसके खेल को खराब करे। वह काफी चिल्लाती रही, निशांत खेलता रहा। मां ने जब यह देखा तो उन्होंने हर किसी को डांट कर भगा दिया। लेकिन लड़कियों से कहा कि वे शोर न करें क्योंकि हमारी गाय और बछड़ी को इससे परेशानी हो रही थी।
अभी कुछ समय पहले जब पड़ोस में किसी के यहां बैंड-बाजा बजा जो दोनों ने गले की रस्सी तोड़ ली और बिदक कर दीवार के कोने में चिपक कर खड़ी हो गयीं।
-in pic minki with cycle in the air
8 मार्च 2011

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