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सोमवार, नवंबर 01, 2010

मन मोह गया FSLG समारोह































FSLG का उदघाटन मनमोहने वाला रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम के में St. mary's convent school gajraula को दूसरा स्थान मिला। जबकि प्रथम स्थान St. mary विकास नगर को मिला तथा तीसरे स्थान पर St. mary डाकपत्थर रहा।

कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि Ritu Joshi ने किया। Ritu Joshi यहां की एक इकाई INSILCO की H R Head हैं। उन्होंने दीप प्रज्जवलित किया और MOTHER MARY की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

इस आयोजन में खेल प्रतियोगिताएं भी हुईं।

मुख्य अतिथि रीतु जोशी ने कहा,‘‘खेल हमारे जीवन में बदलाव लाते हैं। हमें पढ़ाई के साथ खेलों में भी हिस्सा लेना चाहिए।’’

इस दौरान सैंट मैरी की प्रिंसिपल सिस्टर जैन भी मौजूद रहीं। उनके साथ सिस्टर ममता व अन्य टीचर्स मौजूद रहे।










"विश्वास ने दिलाई जीत"

उस समय St. Mary's Convent Sen. Sec. School का प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया जब FSLG प्रतियोगिता में सुमित कसाना और साकिब की जोड़ी ने विकास नगर की badminton जोड़ी को पराजित कर खिताब अपने नाम किया। वास्तव में वे पल शानदार थे।

सुमित कहते हैं,‘‘मुझे विश्वास था कि हम जीतेंगे। साकिब ने मेरा पूरा साथ दिया जो सराहनीय है।’’

उधर साकिब भी कम खुश नजर नहीं आये। उन्होंने इसका श्रेय अपने जोड़ीदार सुमित और टीचर्स को दिया। साकिब सैंट मैरी में कक्षा 9 में पढ़ते हैं।

कक्षा 10 में पढ़ने वाले सुमित कसाना स्वभाव से शांत लगते हैं, लेकिन वे मस्ती के मूड में भी रहते हैं। जहां पढ़ाई में वे अच्छा करते हैं, वहीं खेलों में उनकी रुचि बचपन से रही है। उनके पिता धर्मपाल कसाना अपने बेटे की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे।

जब मैंने सुमित से पूछा कि बैडमिंटन से नाता कैसे जुड़ा? उनका जबाव था,‘‘पिताजी ने मुझे बैडमिंटन का रैकेट एक दिन यूं ही थमाकर कहा कि बेटा यह खेल तुम्हारे मतलब का है।’’

‘‘मुझे लगता है बैडमिंटन में cricket व अन्य खेलों के मुकाबले संभावनायें अधिक हैं। जहां दूसरे खेलों में विशाल मैदान, आदि की आवश्यकता होती है, इसमें ऐसा नहीं है। यह खेल हमें चुस्त-दुरुस्त और मानसिक तौर पर मजबूती भी प्रदान करता है।

Sports टीचर गुरप्रीत सिंह ने अपने खिलाड़ियों को अभ्यास कराने में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। जबकि जगबीर सिंह भी पूरी तरह जुटे रहे। यही कारण रहा कि सैंट मैरी गजरौला ने अपने यहां आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में विपक्षी खिलाड़ियों को मात दी और बेहतर प्रदर्शन किया।

जब मैंने सुमित से पूछा कि पढ़ाई और खेल का तालमेल किस तरह किया, इसपर सुमित ने मुस्कराते हुए कहा,‘‘इसके लिए मैं अपने टीचरों का आभारी हूं। खासकर मैम दूबे ने मुझे क्लास के दौरान बाहर मैदान में प्रैक्टिस की इजाजत दी। वहीं मैम प्रीता, रीना जी, जेस्सी जी, सर ravinder का सहयोग काबिलेतारीफ रहा। प्रिंसिपल सिस्टर जेन का मैं विशेषतौर पर शुक्रिया करना चाहूंगा क्योंकि इतना बेहतर आयोजन गजरौला में सफलतापूर्वक हो सका।’’


बेहतर रहा अनुभव
सैंट मैरी की बालीबाल की लड़कों की दोनों टीमें, सीनियर और जूनियर कुछ खास नहीं कर सकी FSLG प्रतियोगिता में। वैसे जूनियर टीम ने तीन में से दो मैच जीत कर इज्जत बचा ली। जबकि लड़कियों की टीम विजेता बनी।

निशांत भी जूनियर टीम में था। उसका सारा अनुभव बेहतर रहा। पहले वह जाने के लिए मना कर रहा था लेकिन ऐन वक्त पर उसने जाने का निश्चय किया। कुछ देर पहले नये जूते खरीदे और हो गया रवाना। बस स्कूल से ही सभी बच्चों को लेकर मेरठ गयी।

निशांत को इस बात की भी खुशी है कि उसे चार्ट नहीं बनाना पड़ा क्योंकि जो बच्चे प्रतियोगिता में शरीक हुए थे उन्हें उसी के आधार पर नंबर दिये जायेंगे। वैसे सुमित के चार्ट का बार्डर मैंने खुद दो घंटे खर्च कर किया। उसे और धनुष सलैक्ट हो गये हैं। ऐसा जैस्सी जी ने बताया था उसे।

-harminder singh

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