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बुधवार, जुलाई 06, 2011

शुभी नहीं बदलेगी

















शुभी एक बार बोलना शुरु कर दे तो चुप नहीं होती। आज वह काफी स्वीट लग रही थी। हां, पहले से मोटी जरुर हो गयी है।

उसके पास एक छोटी डायरी-नुमा चीज थी जिसे वह ‘बालाजी’ से लायी हुई बता रही थी। उसकी यह पहली यात्रा थी किसी पवित्र-धाम की। इसलिए वह ‘बालाजी’ की यात्रा का वर्णन करते नहीं थक रही थी।

‘जानते हैं, वहां एक महिला बाल खोलकर तांडव कर रही थी।’ वह बोली। फिर उसने वहां के पहाड़ों का जिक्र किया। उसने पता नहीं ढेर सारी वहां की कहानियां-किस्से बताये। सच कहूं वह कुछ ही मिनटों में मेरे कान का कचूमर निकाल गयी।

मुझे यकीन हो गया कि दुनिया इधर की उधर हो जायेगी, लेकिन हमारी शुभी विल नेवर चेंज।



आपका


Harminder Singh



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