सुना है सिस्टर माया स्कूल से चली गयीं। बच्चों को काफी अफसोस है। फेसबुक पर एक लड़की लिखती है,‘Missing Sr. Maya...".ऐसा शायद सैंट मैरी के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी टीचर को इतना मिस किया गया। उसके अलावा यह पहली बार है जब फेसबुक पर इसका जिक्र हुआ।
वैसे, किसी टीचर को बच्चों ने उनके जन्मदिन पर कभी बधाई दी नहीं क्योंकि टीचर फेसबुक पर नहीं हैं। हां, उनके ‘फेक-अकाउंट’ जरुर कुछ शरारती बच्चों ने बना रखे हैं। कभी-कभार दूसरे बच्चों पर रोब गांठ लेते हैं, या टीचरों पर गुस्सा या खीझ या स्कूल की सो-काल्ड ‘इंसल्ट’ का जबाव वाया नैट।
सिस्टर माया को मैं नहीं जानता था। करीब दस साल पहले सैंट मैरी से दसवीं करने के बाद वहां केवल एक ही बार जाने का मौका मिला। तब डोगरा जी, मोहनचंद्रा जी, जगवीर जी और गुरप्रीत सिंह से मिल सका। उस समय यह इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि जुबीलेंट स्टाफ कालोनी के ग्राउंड पर एक कार्यक्रम आयोजित था और अखबार की ओर से आमंत्रण था।
सुमित कसाना और भी कई बच्चे सिस्टर माया का जिक्र करते रहते थे। ‘वे ऐसी हैं’, ‘वे वैसी हैं’, ‘वे अच्छी हैं’, ‘वे मजाकिया भी हैं’। उनका सेंस आफ हयूमर कमाल का है।
वैसे, जो टीचर अच्छे होते हैं उन्हें मिस ही किया जाता है, और वे हमेशा याद भी रहते हैं।
yours
harminder
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