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रविवार, जून 19, 2011

ऊर्जा श्रोत परमाणु

















विश्विख्यात वैज्ञानिक अलवर्ट आइन्स्टीन के सूत्र के अनुसार यदि एक ग्राम पदार्थ को ऊर्जा में बदला जाए तो उससे 900 खरब जूल ऊर्जा पैदा होगी। आइन्स्टीन के इसी सूत्र को प्रयोग में लाकर वैज्ञानिकों ने परमाणु बम का निर्माण किया।

विश्व का पहला परमाणु बम अमेरिका के प्रेफेसर जे.आर. ओपेनहैमर ने बनाया था। इसका सफल परीक्षण 16 जुलाई सन 1945 को प्रात: काल साढ़े पांच बजे अमेरिका के लौस अलमोस नामक स्थान के पास किया गया था। इसके विस्फोट से लगभग 12000 मीटर ऊंचा एक बादल सा बन गया। जिस लौहे की मीनार से इस बम का परीक्षण किया गया था, विस्फोट के बाद उसका नामो निशान न रहा, बल्कि वहां एक बहुत बड़ा गड्ढा बन गया।

परमाणु बम नाभकीय विखंडन क्रिया पर कार्य करता है। नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम जैसे नाभिक पर न्यूट्रोन कणों की बौछार की जाती है। इससे यूरेनियम जैसा नाभिक दो हिस्सों में टूट जाता है। इसके टूटने से कुछ न्यूट्रोन पैछा होते हैं और बहुत अधिक ऊर्जा पैदा होती है। यूरेनियम के एक नाभिक के टूटने से बेरियम और क्रिप्टन के दो नाभिक बनते हैं और साथ ही साथ कुछ न्यूट्रोन तथा 20 मिलियन इलेक्ट्रोन वोल्ट ऊर्जा पैदा होती है। नाभिकीय विखंडन में पैदा हुए न्यूट्रोन यूरेनियम के दूसरे नाभिकों को तोड़ते चले जाते हैं। इस प्रकार नाभिकों के टूटने की एक श्रंखला बन जाती है जिससे अपार ऊर्जा पैदा होती है। यदि इस क्रिया को नियंत्रित न किया जाए, तो यही परमाणु बम के विस्फोट का रुप धारण कर लेती है।

परमाणु बम के निर्माण में यूरेनियम 235 या प्लूटोनियम धातु को प्रयोग में लाया जाता है। इन धातुओं में से किसी एक धातु के दो टुकड़े एक मजबूत खोल में अलग-अलग रखे जाते हैं। जब बम का विस्फोट करना होता है तो इन टुकड़ों को आपस में मिला दिया जाता है। ऐसा करने से कास्मिक किरणों में उपस्थित कुछ न्यूट्रोन विखंडन प्रक्रिया शुरु कर देते हैं। यही श्रंखला प्रक्रिया तीव्र गति से शुरु हो जाती है जिससे अपार ऊर्जा पैदा होती है। यही परमाणु बम का विस्फोट कहलाता है।

-Karishma Singh

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