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मंगलवार, जून 28, 2011

पढ़ाई लिखाई यानि टेंशन के बादल

कई बच्चे हमेशा पढ़ाई से बचने के मूड में रहते हैं। अब प्रिया को ही ले लो। देखने में कितनी मेहनती लगती है, मगर जब पढ़ाई-लिखाई की बात आती है तो वह टेंशन के बादलों में कहीं खो जाती है। अब बरसात हो तब कहीं बादल छंटें भी, लेकिन ऐसा यहां मुश्किल होता है।

प्रिया में सभी गुण हैं जो उस उम्र की एक आदर्श लड़की में होने चाहिएं। बस किताबों से जी चुराती है। उसका रिजल्ट कार्ड देखिये आप मुझे बेवकूफ कहेंगे कि बेचारी बच्ची को खुलेआम ‘पढ़ाई का चोर’ साबित करने पर तुले हैं। 70 प्रतिशत औसत के नंबर उतने बुरे कहां? भई, मैं चाहता हूं कि अगर वह जी चुराना बीस प्रतिशत कम कर दे तो 80 परसेंट तक पहुंच जायेगी वह।

मैंने मुकुल की बात पहले की थी। वह तो किताब उठाकर देखता ही नहीं। वह प्रिया से कई कदम आगे है। पढ़ाई-लिखाई उसके लिए काले से भी काले मेघों का घेरा है। वह मुझे ‘तारे जमीन पर’ के नन्हें हीरो की तरह लगता है। अभी तक उसे आमिर खान जैसा कोई टीचर नहीं मिला।

मेरे विचार में छुट्टियां कम हों। छुट्टियां बच्चों को आलसी बनाती हैं।

-Harminder Singh

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