
जिंदगी को जिंदगी की तलाश है,
इन आंखों में भी एक आस है।
कानों में भी कुछ सुनने की आस है,
हर किसी को किसी की तलाश है।
हमें खुशी की और खुशी को हमारी तलाश है,
जिंदगी को जिंदगी की तलाश है।
बुझते हुए दीये को रोशनी की तलाश है,
पतझड़ को सावन की प्यास है।
ज्येष्ठ के महीने को सावन से आस है,
जिंदगी को हमसे नहीं,
हमें जिंदगी से शिकायत है।
दगा करते हैं हमसे क्यों अपने,
जबकि हमें अपनों से ही आस है।
-Anshika Agarwal
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