
बच्चों पे होते अत्याचार,
और वह भी बारम्बार,
करते हैं वे कितना श्रम,
फिर भी पैसे मिलते कम,
फिरते हैं वे मारे मारे,
भूखे प्यासे वे बेचारे,
फुटपाथ पर हैं वे सारे,
जैसे मुरझाये फूल हो प्यारे,
आती है मुझको दया,
इन बच्चों को देख सदा,
चाहे हो कोई खुशी का पल,
या फिर हो दुख पग पग पर,
फिर भी हंसते रहते हैं वे सदा,
यह सोचकर आती है हमें दया।
-Kavita Tandon
दयाभाव के लिए धन्यवाद
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